Rakhi Festival... | Starbanquet

Rakhi Festival…

Posted by Rahul Minhas on August 30, 2018 at 3:38 pm filled under Uncategorized Category

सभी मित्रों को मेरा प्यार भरा नमस्कार 🌼🌸🙏🏻

लो जी आ गया, फिर राखी का त्योहार, आप सब को बहुत बहुत शुभकामनायें 🌼🌸😊

कुछ ही त्योहार ऐसे हैं जिन्होने बचपन को अब तक बाँध के रखा है, वरना हम तो धीरे धीरे, वक्त के बहाव में इतने बडे और समझदार हो गये कि अपनी बहन से, हँसना, कहकहे लगाना, थोडा बहुत मस्ती , छेडखानी करना, और बचपना करना मानो भूल सा ही गये हैं । 🌼🌸😌

शादी हो गई, और व्यस्तता होने से आना जाना कम क्या हुआ, बहन मेहमान लगने लग गई, जिससे प्यार भरे, लडाई झगडे करते करते पूरा बचपन बिता दिया, उसकी वो प्यारी प्यारी यादें भी वक्त बीतते बीतते अब धुँधली सी होती जा रही हैं, थोडी शरारतें, थोडी जिन्दादिली अगर जीवन में रह भी जाये, तो हर्ज ही क्या है । 🌼🌸🐥

आज कल तो त्योहार के आने से पहले ही भीड भरे बाजार के, और ट्रैफ़िक जाम के बुरे बुरे सपने आने लगते हैं, अगर सुकून गायब हुआ है तो यह हमारे अन्धाधुन्ध जहरीला धुआँ उगलने वाले लोहे के Branded खिलौने, खरीदने के शौक के कारण ही हुआ है, जरूरतें जब Status Symbol बन जाये तो हालात बिगडने शुरु हो ही जाते हैं । 🚘🚘

समय बचाने को, नई नई कारें तो घरों में आती जा रही हैं, पर वक्त है कि हाथों से निकलता ही जा रहा है, वक्त, इतना तेज गति तो कभी नहीं था कि, कब सुबह हुई और कब शाम हुई, ये भी पता ही न चले, अब तो महीना शुरू होते होते कब समाप्त हो गया, हमें यह भी पता नहीं चलता । ⏰

ज्यादा नहीं 20-25 साल पहले तक भी बहुत सुकून चैन था, सावन के महीने में झूमते हुये मौर भी दिख जाते थे, गौरय्या चिडिया तो घरों के रौशनदानों में आमतौर पर दिखती ही रहती थी । 🐥🐥

आओ, फिर से उस पुराने गुडगाव को चलें, जहां पेड बहुत अधिक थे, पक्षी बेहिसाब थे, और शोर मचाने वाली, मोटर कारें तो, बस न के बराबर ही थी, हवा भी खुली और मदमस्त थी, हम सबके पास समय ही समय ही समय था, अपने लिये भी और रिश्तों के लिये भी 🌴🌴💛

RAHUL MINHAS
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