Moral Values in Life | Starbanquet

Moral Values in Life

Posted by Rahul Minhas on November 29, 2018 at 4:00 pm filled under Uncategorized Category

शान्त जल में पत्थर, तब तक गिरते ही रहेंगे, जब तक नीचे तल पर जमी हुई मिट्टी, पानी के गँदा होने का कारण बनती रहेगी, मिट्टी के हटने पर, पानी के शुद्ध होते ही, प्रकृति यह खेल, स्वयं ही बन्द कर देगी,

सही बात तो यह है कि, हमारे जीवन की, एक भी घटना, ऐसी नहीं, जो पहले से तय न हो, हर अच्छी बुरी घटना, प्रकृति के, कर्म और कर्मफल के, अचूक चक्रव्यूह का ही परिणाम है,

घटनाओं की यह प्रक्रिया, केवल हमको अपने शुद्धतम स्वरूप में लाने के लिये ही है, इसका और कोई भी कारण नहीं है, पानी की अशुद्धियां हों या वस्त्रों का मैलापन, उजला होने के लिये, कष्टों में से तो निकलना ही होगा,

मर्यादा पुरुषोतम राजा राम के जीवन पर, अगर गौर करें तो पायेंगे कि उनका जीवन कभी न रुकने वाली आपदाओं से भरा हुआ था, बेहद उच्च कुलीन राज परिवार में जन्मे राजकुमार का भाग्य होने के बावजूद, घटनाओं के चक्रव्यूह में वे सदा उलझे ही रहे,

विवाह होने के बाद राज्य अभिषेक के शुभ मौके पर, पत्नी के साथ, 14 वर्ष जँगल जाकर भटकने को विवश होना पडा,

ये बुरे हालात ही काफी थे, उपर से पत्नी सीताहरन का सदमा और फिर उनके वापिस लाने को अयोध्या से तमिलनाडू, और फिर लँका तक का मुंश्किलों भरे सफर ने, उनके धैर्य की कई परीक्षायें ली,

पत्नी सीता को वापिस लाकर चैन की साँस ही ली थी, कि राजनीति के घटनाक्रम ने कुछ ऐसा मोड लिया कि, राजधर्म निभाते हुये, गर्भवती पत्नी को, ह्रदय पर पत्थर रखकर, अकेले जँगल भेजने का निर्णय लेना पडा,

जहाँ उनके दो पुत्रों का जन्म हुआ, बाद मे परिस्तिथि वश अन्जाने में उन्हे अपने ही पुत्रों से युद्ध तक करना पडा, और उनकी हत्या करने का अनर्थ करने से भी बाल बाल बचे, और अन्त में पत्नी सीता ने, उनके वियोग में, वन में ही प्राण त्याग दिये,

आप उनके इस जीवन के बारे में क्या कहेंगे, लेकिन आज हम उनको पूजते हैं, क्योकि परिस्तिथि कुछ भी रही हो, उन्होने अपने नैतिक मूल्यों का कभी, त्याग नहीं किया, कभी किसी को दोष नहीं दिया, कभी अपना मानसिक संतुलन नहीं खोया, और हमेशा जीवन में धैर्य बनाये रखा,

आप सबको मेरा प्यार भरा नमस्कार

राहुल मिन्हास